Udaipur Files फिल्म पर दिल्ली हाईकोर्ट ने रोक लगाई है। निर्माता अमित जानी फैसले से असंतुष्ट होकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए हैं। जानें पूरी खबर और विवाद का कारण।
Udaipur Files: दिल्ली हाईकोर्ट से रोक के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे निर्माता, बोले- यह सिर्फ फिल्म नहीं, न्याय की लड़ाई है
2022 में राजस्थान के उदयपुर में हुए दर्ज़ी कन्हैया लाल की नृशंस हत्या पर आधारित फिल्म Udaipur Files की रिलीज पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अस्थायी रोक लगा दी है। फिल्म के निर्माता अमित जानी इस फैसले से असंतुष्ट हैं और अब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।
बात करते हुए अमित जानी ने कहा, “हमने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है क्योंकि हम उससे संतुष्ट नहीं हैं। हमने कोर्ट से अनुरोध किया था कि वह फिल्म खुद देखे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। फिल्म को किसी भी व्यक्ति के सामने रैंडमली नहीं दिखाया जा सकता, फिर भी हमने हाईकोर्ट के आदेश का पालन किया।”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कोर्ट ने केवल कपिल सिब्बल की दलीलों को ही गंभीरता से सुना, जो मौलाना अरशद मदनी के वकील हैं। “ऐसा लग रहा था मानो सिब्बल साहब ही फैसले लिख रहे हों,” जानी ने कहा।
Udaipur Files पर विवाद क्यों?
यह फिल्म कन्हैया लाल की हत्या की सच्ची घटना पर आधारित है, जिसे दो कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पोस्ट के चलते सरेआम मार डाला था। यह घटना देशभर में गुस्से का कारण बनी थी और समाज में बढ़ते कट्टरवाद पर सवाल खड़े हुए थे।
Udaipur Files पहले से ही सेंसर बोर्ड (CBFC) से प्रमाणन प्राप्त कर चुकी है, लेकिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद और पत्रकार प्रशांत टंडन द्वारा दाखिल याचिकाओं में आरोप लगाया गया कि यह फिल्म साम्प्रदायिक सौहार्द बिगाड़ सकती है और चुनावी माहौल में तनाव पैदा कर सकती है।
दिल्ली हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस अनीश दयाल शामिल थे, ने यह फैसला सुनाया कि जब तक सेंसर प्रमाणन के खिलाफ दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर फैसला नहीं हो जाता, तब तक फिल्म की रिलीज पर रोक बनी रहेगी।

निर्देशक का पक्ष: ‘यह मनोरंजन नहीं, न्याय की फिल्म है’
फिल्म के निर्देशक भरत एस श्रीनाथे ने भी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब भी कोई नॉन-फिक्शन फिल्म बनाई जाती है, तो कुछ समुदायों को आपत्ति होती है, जबकि सेंसर बोर्ड कुछ भी आपत्तिजनक मंज़ूरी नहीं देता।
उन्होंने कहा, “अगर किसी समुदाय ने हमला किया है, तो उसे दिखाना ज़रूरी है। अब हमें कहा जा रहा है कि हम communal harmony तोड़ रहे हैं, लेकिन क्या ‘PK’ जैसी फिल्मों ने साम्प्रदायिक सौहार्द नहीं बिगाड़ा था?”
निर्देशक ने यह भी जोड़ा, “हमारी फिल्म कोई मसाला फिल्म नहीं है। यह न्याय की आवाज़ है। और जब केंद्र सरकार भी इसमें शामिल हो गई है, तो हमें भरोसा है कि मोदी जी के रहते न्याय मिलेगा।”
Udaipur Files: क्या सिर्फ फिल्म ही जल्दी बैन होती है?
अमित जानी ने यह भी कहा कि, “कन्हैया लाल की हत्या को तीन साल हो गए हैं लेकिन अब तक कोर्ट से परिवार को कुछ नहीं मिला। हत्यारे ज़मानत पर हैं, लेकिन फिल्म की रिलीज़ पर तीन दिन में फैसला हो गया। अगर न्याय इतना तेज़ होता, तो हमें यह फिल्म बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।”
उन्होंने यह भी दावा किया कि Udaipur Files को 11 जुलाई को रिलीज किया जाना था और हजारों स्क्रीन पहले ही हाउसफुल थीं। “करोड़ों लोग यह फिल्म देखना चाहते थे, लेकिन कुछ मदरसों की आपत्तियों को तवज्जो दी जा रही है,” उन्होंने कहा।
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