RBI: भारतीय रिजर्व बैंक समय – समय पर अपने नियमों में संशोधन करता है,जो लोगों के हित में रहता है. रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने हाल ही में अपने मिनिमम बैलेंस को लेकर बड़े बदलाव का ऐलान किया है. ऐसे में लोगों का यह जानना बेहद जरूरी हो गया है कि उन्हें अपने Bank Account में कितने पैसे रखने चाहिए. तो चलिए बिना देरी जानते हैं RBI के मिनिमम बैलेंस के नए नियम के बारे में और क्यों बदला ये नियम?

क्या है RBI का नया नियम?
रिजर्व बैंक आफ इंडिया (RBI) ने हाल ही में कहा -” बैंक स्कॉलरशिप या डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर पाने के लिए खोले गए खातों को निष्क्रिय के रूप में क्लासिफाई नहीं कर सकते हैं. भले ही इन खातों का इस्तेमाल दो साल से अधिक समय तक नहीं किया गया हो.” RBI का निष्क्रिय खातों के लिए एक सर्कुलर जारी किया है. जिसके जरिए बैंकों को निर्देश दिए गए हैं.

RBI के नए नियम के मुताबिक बैंकों को कस्टमर को एसएमएस, लेटर या मेल के जरिए उनके खातों को निष्क्रिय होने की जानकारी देनी होगी. इस सर्कुलर में बैंकों से ये भी कहा गया है कि अगर कोई निष्क्रिय खाते का मालिक जवाब नहीं देता है तो बैंक उस व्यक्ति से संपर्क करें, जो खाताधारक या खाताधारक के नॉमिनी का परिचय कराया था.
मिनिमम बैलेंस मेनटेन को लेकर आरबीआई का फैसला
RBI के मुताबिक बैंकों को निष्क्रिय किए गए खातों में मिनिमम बैलेंस मेनटेन नहीं करने पर पेनाल्टी लगाने की इजाजत नहीं दी गई है.नियम के मुताबिक निष्क्रिय खातों को एक्टिव करने के लिए कोई चार्ज नहीं लिया जाएगा.

RBI की लेटेस्ट रिपोर्ट के मुताबिक मार्च 2023 तक अनकलेम्ड डिपॉजिट में 28 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है और ये 42272 करोड़ रुपए तक पहुंच गई है. वो डिपॉजिट अकाउंट्स, जो 10 साल या उससे अधिक समय से ऑपरेट नहीं किया गया है, उसके बैलेंस को बैंक आरबीआई की डिपॉजिटर और एजुकेशन अवेयरनेस फंड में ट्रांसफर करेंगे.
क्यों बदला नियम?
आरबीआई ने कहा – “कई उधारकर्ता की तरफ से उन शर्तों के साथ चूक या गैर-अनुपालन के मामले में पीनल चार्ज का इस्तेमाल करते हैं. यह उन शर्तों पर भी लागू होता है जिसके तहत कोई लोन मिलता है. बैंक को अनुशासन बनाए रखने के लिए आरबीआई ने कहा के बैंक पीनल चार्ज को कमाई का जरिया ना बनाए. कई संस्था पीनल चार्ज के जरिये पैसे कमाते हैं. इन्हीं बातों का ध्यान रखते हुए केंद्रीय बैंक ने यह गाइडलाइन जारी की है.”
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